दशहारे पर निबंध (dashare per nibandh)-परीक्षा स्पेशल निबंध

प्रस्तावना 

दशहरा भारत का एक प्रमुख और लोकप्रिय त्योहार है। इसे विजयदशमी भी कहा जाता है। यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। इस दिन भगवान राम ने राक्षस राजा रावण का वध किया था। यह पर्व हमें सच्चाई, धर्म और सदाचार का पालन करने की प्रेरणा देता है।

Dashare per nibandh

इस ब्लॉग पोस्ट “दशहारे पर निबंध (Dashahare Per Nibandh) – आसान भाषा में” में आपको दशहरा से जुड़ी पूरी और विस्तृत जानकारी सरल हिंदी में मिलेगी।

यह लेख विशेष रूप से कक्षा 6 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए तैयार किया गया है, ताकि वे परीक्षा, भाषण या होमवर्क के लिए सीधे उपयोग कर सकें।

इस लेख में आप पढ़ेंगे:

Table of Contents

अंत तक पढ़ें और दशहरा के धार्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और नैतिक महत्व को आसान भाषा में समझें।

दशहरा क्या है ?

दशहरा हिंदूओं का एक पवन त्यौहार है इस पूरे भारत में बहुत ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है।

यह त्यौहार हर साल आश्विन मास के शुक्ल पक्ष के दसवीं तिथि को मनाया जाता है।

दशहरा बुराई पर अच्छाई के जीत का प्रतीक है।

दशहरा का अर्थ 

यह शब्द संस्कृत भाषा के दो शब्दों ‘दश’ और ‘हारा’ से मिलकर बना है। ‘दश’ का अर्थ दस (10) और ‘हारा’ का अर्थ पराजय होता है। अर्थात दशहरा का शाब्दिक अर्थ दस शिर सर वाले रावण की हार या पराजय है 

दशहरा का महत्व 

इस दिन श्री भगवान राम ने रावण का वध किए थे और मां दुर्गा ने महिषासुर के।दोनों युद्ध में अंत में सत्य धर्म और अच्छाई की जीत हुई। यह त्यौहार हमें हर साल सत्य और धर्म की मांग पर चलने की प्रेरणा देता है।

दशहरा का संदेश

दशहरा का त्योहार हमें यह सिखाता है कि हमें हमेशा सत्य और धर्म के मार्ग पर चलना चाहिए। हमें अपने जीवन में अनुशासन अपनाना चाहिए। बुरी आदतों जैसे आलस्य, गुस्सा और झूठ को त्यागना चाहिए। बुराई कितनी भी शक्तिशाली क्यों ना हो, अंत में उसका हार अवश्य होता है। कठिनाइयों से डरने के बजाय उनका सामना करना चाहिए। अपने लक्ष्य की ओर ईमानदारी से मेहनत करनी चाहिए।जैसे भगवान राम ने धैर्य और साहस से कठिन परिस्थितियों का सामना किया, वैसे ही हमें भी अपने जीवन में संघर्ष से नहीं घबराना चाहिए।

दशहरा पर निबंध 

दशहरा भारत का एक प्रसिद्ध त्यौहार है जिसे विजय दशमी के नाम से भी जाना जाता है इस त्यौहार को प्रत्येक साल अश्विन मांस के शुक्ल पक्ष के दसवीं  को मनाया जाता है।

यह त्योहार बुराई पर अच्छाई, अधर्म धर्म पर धर्म और असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक है।

शास्त्रों के अनुसार इस दिन भगवान राम ने लंका पति रावण को वध कर माता सीता को उसकी कैद से छुड़वाए।

मां दुर्गा ने नौ दिनों की लंबी लड़ाई के बाद इसी दिन बुराई के प्रतीक राक्षस महिषासुर का वध किए थे 

कई स्थानों पर दशहरा के दिन दुर्गा पूजा का समापन भी होता है। इस दिन लोग एक-दूसरे को शुभकामनाएँ देते हैं और मिठाइयाँ बाँटते हैं। दशहरा समाज में भाईचारा, एकता और सत्य की भावना को मजबूत करता है। 

दशहरा हमें सिखाता है कि जीवन में हमेशा सच्चाई, अच्छाई और धर्म के मार्ग पर चलना चाहिए। यह त्योहार भारतीय संस्कृति और परंपरा का प्रतीक है।

 

विजयदशमी पर निबंध (Vijayadashami Essay in Hindi)

विजयदशमी, जिसे दशहरा भी कहा जाता है, भारत का एक प्रमुख और पवित्र पर्व है। यह त्योहार अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। विजयादशमी बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। इस दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध किया था और माँ दुर्गा ने महिषासुर पर विजय प्राप्त की थी।

यह पर्व हमें सिखाता है कि सत्य और धर्म की हमेशा विजय होती है।

विजयदशमी का अर्थ

“विजय दशमी” शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है  विजय और दशमी। जिसमें विजय का अर्थ है जीत

दशमी का अर्थ है दसवां दिन।

मां दुर्गा को 9 दिन की लंबी युद्ध के बाद दसवां दिन महिषासुर पर विजय प्राप्त हुआ था इसलिए यह त्योहार नवरात्रि के दसवें दिन मनाया जाता है और विजयदशमी कहा जाता है।

 

विजयदशमी का पौराणिक महत्व

भगवान श्रीराम की विजय

राम ने लंका के राजा रावण का वध इसी दिन किया था। रावण अहंकार, अन्याय और अधर्म का प्रतीक था। राम ने धर्म और सत्य की रक्षा के लिए युद्ध किया और विजय प्राप्त की।

इसी कारण कई स्थानों पर रावण दहन किया जाता है।

माँ दुर्गा की विजय

दुर्गा ने दस दिनों तक युद्ध करके महिषासुर का वध किया। इसलिए इसे शक्ति की विजय भी कहा जाता है।

पश्चिम बंगाल में इस दिन दुर्गा विसर्जन किया जाता है।

 

विजयदशमी कैसे मनाई जाती है?

जगह-जगह रामलीला का आयोजन होता है।

रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतले जलाए जाते हैं।

लोग नए कार्यों की शुरुआत करते हैं।

शस्त्र पूजन और वाहन पूजन किया जाता है।

बच्चे और बड़े मेले का आनंद लेते हैं।

विजयदशमी का सामाजिक महत्व

यह त्योहार हमें बुराइयों से दूर रहने की प्रेरणा देता है।

समाज में एकता और भाईचारा बढ़ाता है।

यह हमें सच्चाई, साहस और धर्म के मार्ग पर चलने की शिक्षा देता है।

छात्रों के लिए विजयदशमी का महत्व छात्रों के जीवन में भी विजयदशमी का विशेष महत्व है।

यह दिन हमें सिखाता है कि

कठिनाइयों से डरना नहीं चाहिए।

मेहनत और सत्य के मार्ग पर चलना चाहिए और बुरे विचारों को त्यागना चाहिए।

निष्कर्ष

विजयदशमी केवल एक त्योहार नहीं है, बल्कि यह सत्य, धर्म और न्याय की विजय का संदेश देता है। हमें अपने जीवन से अहंकार, क्रोध और बुराई को समाप्त कर अच्छाई को अपनाना चाहिए।

अंत में, विजयदशमी हमें यह सिखाती है कि चाहे परिस्थितियाँ कैसी भी हों, अंत में हमेशा सत्य की ही जीत होती है।

दशहरा पर निबंध 10 लाइन 

  1. दशहरा भारत का एक प्रमुख हिन्दू त्यौहार है।
  2. इसे कुछ लोग इसे विजयादशमी के नाम से भी जाना जाते है ।
  3. यह त्यौहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।
  4. दशहरा अश्विन महीने की दशमी तिथि को मनाया जाता है।
  5. इस दिन भगवान राम ने रावण का वध किया था।
  6. जगह-जगह मेल और रामलीला का आयोजन होता है।
  7. रावण, मेघनाद और कुम्भकर्ण के पुतलों का दहन किया जाता है।
  8. लोग नए कपड़े पहनते हैं और मिठाइयाँ बाँटते हैं।
  9. बच्चे इस त्योहार का खास आनंद लेते है।
  10. यह त्यौहार भाईचारे और सत्य की राह पर चलने की प्रेरणा देता है।

दशहरा पर निबंध 20 शब्दों में

  1. दशहरा भारत का एक प्रमुख पर्व है।
  2. यह त्यौहार बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है।
  3. दशहरा आश्विन माह के शुक्ल दशमी को मनाया जाता है।
  4. इस त्योहार की मुख्य कथा राम और रावण से जुड़ी है।
  5. भगवान राम ने रावण का वध कर लंका पर विजय प्राप्त की।
  6. दशहरा नवरात्रि के बाद मनाया जाता है।
  7. नवरात्रि में देवी दुर्गा की पूजा की जाती है।
  8. दशहरा के दिन रावण के पुतले जलाए जाते हैं।
  9. इसमें मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतले भी जलते हैं।
  10. यह पर्व पूरे भारत में उत्साह से मनाया जाता है।
  11. उत्तर भारत में रामलीला का आयोजन होता है।
  12. रामलीला में रामायण की कथा का मंचन किया जाता है।
  13. दशहरा के अवसर पर मेले लगते हैं।
  14. लोग नए कपड़े पहनकर खुशियां मनाते हैं।
  15. यह त्योहार एकता और साहस का संदेश देता है।
  16. दशहरा पर शस्त्र पूजन की परंपरा है।
  17. कई जगहों पर विजयादशमी के नाम से जाना जाता है।
  18. यह पर्व हमें सत्य की जीत सिखाता है।
  19. दशहरा परिवार और समाज को जोड़ता है।
  20. यह त्योहार हमें अधर्म पर धर्म की विजय का पाठ पढ़ाता है।

 

दशहरा कब है 2026

यह त्यौहार प्रत्येक वर्ष आश्विन माह के शुक्ल पक्ष के दशमी तिथि को पड़ता हैं 2026 का दशहरा 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा लेकिन भारत के कुछ क्षेत्रों में जैसे बंगाल में 21 अक्टूबर को मनाया जा सकता हैं।

दशहरा पर निबंध 200 शब्दों में (Essay on Dussehra in hindi 100 word)

दशहरा भारत का एक महत्वपूर्ण और लोकप्रिय त्योहार है, जिसे विजयादशमी के नाम से भी जाना जाता है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी दिन भगवान श्रीराम ने रावण का अंत किया था और देवी दुर्गा ने महिषासुर का। इसलिए यह त्योहार हमें सत्य, धर्म और ईमानदारी के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

दशहरा नवरात्रि के नौ दिनों की उपासना के बाद दसवें दिन मनाया जाता है। इस अवसर पर भारत के अधिकांश शहरों में मेला और रामलीला का आयोजन किया जाता हैं। शाम को रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों का दहन किया जाता है, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग एकत्रित होते हैं। विद्यालयों में भी इस त्यौहार के अवसर पर, दशहरे के कुछ दिन पहले निबंध,भाषण और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं क्योंकि दशहरा के दिन सरकारी छुट्टी होता है।

यह पर्व हमें यह सीख देता है कि हमें अपने अंदर की बुराइयों जैसे क्रोध, लोभ और अहंकार को त्यागना चाहिए। दशहरा समाज में प्रेम, एकता और भाईचारे की भावना को मजबूत करता है।

इस प्रकार, दशहरा केवल धार्मिक उत्सव ही नहीं, बल्कि नैतिक मूल्यों को अपनाने का संदेश देने वाला प्रेरणादायक पर्व है। विद्यार्थियों को इसके महत्व को समझकर अपने जीवन में सद्गुणों को अपनाना चाहिए।

 

दशहरा पर निबंध (Dussehra hindi essay) 500 शब्दों में

प्रस्तावना 

दशहरा, जिसे विजयादशमी भी कहा जाता है, भारत का एक प्रमुख त्योहार है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। दशहरा हर साल अश्विन मास की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। यह त्योहार नौ दिनों तक चलने वाले नवरात्रि उत्सव के बाद दसवें दिन मनाया जाता है।

दशहरा त्योहार पूरे देश में बड़े ही धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया जाता है।

दशहरा का महत्व

 

दशहरा का महत्व भारतीय संस्कृति में बहुत खास है। यह पर्व हमें सिखाता है कि बुराई चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हो, अंत में अच्छाई की ही जीत होती है। 

दशहरा केवल एक धार्मिक पर्व नहीं है, बल्कि यह हमारे जीवन को सही दिशा देने वाला एक त्योहार है, क्योंकि यह त्योहार समाज में सत्य, धर्म और न्याय के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। 

यह हमें सिखाता है कि जिस तरह राम ने रावण पर विजय प्राप्त किया इसी तरह अपने मेहनत,ईमानदारी और साहस से हर मुश्किल को पर किया जा सकता हैं। इस दिन भारत के कई राज्यों में लोग अपने पुराने हथियार,औजार और किताबों की पूजा भी करते हैं, जिससे ज्ञान और शक्ति का सम्मान होता है।

यह त्यौहार हमारे अंदर आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच को भी बढ़ाता है।

दशहरा का इतिहास

दशहरा का इतिहास बहुत पुराना है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध कर माता अयोध्या सीता को अयोध्या वापस लाए थे। इसलिए दशहरा को विजयादशमी भी कहा जाता है। इसके अलावा, महाभारत के अनुसार, पांडवों ने अपने छुपाए हुए शस्त्र इसी दिन निकाले थे और कौरवों पर विजय प्राप्त की थी। इस तरह दशहरा का पर्व हमें विजय का संदेश देता है।

दशहरा की परंपराएँ

दशहरा के अवसर पर लोग अपने परिवार, संबंधी और दोस्तों से मिलते है और एक-दूसरे कोदशहरा के शुभकामनाएं देते हैं।

दशहरा के दिन भारत के कई कई राज्य में भव्य मेला आयोजित किया जाता है और रावण, मेघनाथ और कुंभकरण के बड़े-बड़े पुतले बनाए जाते हैं। शाम होते ही इन पुतलों का दहन किया जाता है, जिससे बुराई का अंत दिखाया जाता है। कई जगहों पर रामलीला का आयोजन भी होता है, जिसमें भगवान राम की कथा का मंचन किया जाता है। बच्चे, बड़े और बुजुर्ग सभी इस त्योहार का आनंद लेते हैं।

दशहरा का संदेश

दशहरा का त्योहार हमें यह सिखाता है कि हमें हमेशा सत्य और धर्म के मार्ग पर चलना चाहिए। हमें अपने जीवन में अनुशासन अपनाना चाहिए। बुरी आदतों जैसे आलस्य, गुस्सा और झूठ को त्यागना चाहिए। बुराई कितनी भी शक्तिशाली क्यों ना हो,अंत में उसका हार अवश्य होता है। कठिनाइयों से डरने के बजाय उनका सामना करना चाहिए। अपने लक्ष्य की ओर ईमानदारी से मेहनत करनी चाहिए।जैसे भगवान राम ने धैर्य और साहस से कठिन परिस्थितियों का सामना किया, वैसे ही हमें भी अपने जीवन में संघर्ष से नहीं घबराना चाहिए।

निष्कर्ष

दशहरा का पर्व भारतीय संस्कृति और परंपराओं का सुंदर उदाहरण है। यह त्योहार हमें अच्छाई की राह पर चलने की प्रेरणा देता है। हमें दशहरा से सीख लेकर अपने जीवन में भी बुराइयों का त्याग करना चाहिए और सत्य, धर्म व न्याय का पालन करना चाहिए।

दशहरा पर निबंध 1000 शब्दों में

दशहरा भारत का एक बहुत ही महत्वपूर्ण और प्रसिद्ध त्योहार है। जिसे विजय दशमी भी कहा जाता हैं क्योंकि यह दसवें दिन मिली विजय का प्रतीक है। चाहे वह भगवान राम की रावण पर जीत हो या माँ दुर्गा की महिषासुर पर विजय यह दोनों विजय हमें बताता है कि हमेशा सत्य और धर्म की जीत होती है और बुराई की हमेशा हार होती है। यह त्योहार हर साल बड़ी खुशी और उत्साह के साथ मनाया जाता है। मुझे दशहरा का त्योहार बहुत अच्छा लगता है, क्योंकि इस दिन रावण दहन होता है, मेले लगते हैं और चारों ओर खुशी का माहौल होता है।

दशहरा हमें सिखाता है कि बुराई चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हो, अंत में जीत हमेशा अच्छाई की ही होती है। इसीलिए इस दिन को विजयादशमी भी कहा जाता है। यह त्योहार नवरात्रि के नौ दिनों के बाद दसवें दिन मनाया जाता है।

दशहरा का पौराणिक महत्व

दशहरा का संबंध रामायण से है। रामायण के अनुसार अयोध्या के राजा भगवान श्री राम ने लंका के राजा रावण को युद्ध में हराया थे।

रावण बहुत विद्वान और शक्तिशाली था, लेकिन उसमें घमंड बहुत था। उसने माता सीता का हरण किया था। तब भगवान राम ने अपने भाई लक्ष्मण और भक्त हनुमान की सहायता से रावण से युद्ध किया और उसे पराजित किया।

कुछ स्थानों पर यह पर्व देवी दुर्गा द्वारा महिषासुर नामक राक्षस के वध की याद में भी मनाया जाता है। इसलिए दशहरा को विजय का प्रतीक माना जाता है।

दशहरा कैसे मनाया जाता है?

दशहरा पूरे भारत में अलग-अलग तरीकों से मनाया जाता है।

इस अवसर पर भारत के अधिकांश शहरों में भव्य मेला का आयोजन किया जाता है जहां बच्चे झूले झूलते हैं और खिलौने खरीदते हैं।

इस दिन रामलीला का आयोजन किया जाता है। और रावण, मेघनाथ और कुंभकर्ण के पुतले बताए जाते हैं जिसे शाम को आतिशबाजी के साथ जलाया जाता हैं और लोग तालियां बजते हैं उस समय ऐसा लगता है जैसे बुराई सच में खत्म हो रही हो।

बच्चे,बड़े और बूढ़े सभी नए कपड़े पहनते हैं,मिठाइयाँ खाते हैं और एक दूसरे को दशहरा की शुभकामनाएं देते हैं।

इस दिन अधिकांश स्कूल, कॉलेज और सरकारी दफ्तरों में अवकाश रहता है,जिससे सभी लोग इस पावन पर्व को अपने परिवार के साथ आनंदपूर्वक मना सकें।

भारत के विभिन्न राज्यों में दशहरा

भारत के अलग-अलग राज्यों में दशहरा अलग-अलग ढंग से मनाया जाता है।

उत्तर भारत में दशहरा के शुभ अवसर पर रामलीला बहुत प्रसिद्ध है। इस अवसर पर कई दिनों तक रामायण की कथा का मंचन किया जाता है और दशमी के दिन रावण दहन होता है।

पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा बहुत धूमधाम से मनाई जाती है। बड़े-बड़े पंडाल सजाए जाते हैं और देवी की सुंदर प्रतिमाएं बनाई जाती हैं। मेले का आयोजन किया जाता है और रावण के पुतले को जलाया जाता है। 

दक्षिण भारत के मैसूर का दशहरा बहुत प्रसिद्ध है। वहां भव्य शोभायात्रा निकाली जाती है और पूरा शहर रोशनी से जगमगा उठता है।

दशहरा हमें क्या सिखाता है?

दशहरा केवल त्योहार नहीं है, यह हमें कई अच्छी बातें सिखाता है जैसे-

हमेशा सच की जीत होती है 

जैसे भगवान राम ने हमेशा सच और धर्म का साथ दिया।

अहंकार बुरा होता है

जैसे रावण बहुत ज्ञानी था, लेकिन उसका घमंड उसकी हार का कारण बना।

किसी भी कार्य में सफलता पानी के लिए धैर्य और साहस जरूरी है

जीवन में सफलता पाने के लिए मेहनत के साथ धैर्य और साहस की जरूरत होती है।

बुराइयों को छोड़ना चाहिए

हमें अपने अंदर की बुराइयों जैसे क्रोध, ईर्ष्या और आलस्य को दूर करना चाहिए। क्योंकि यहां हमारा असली दुश्मन होता है।

विद्यार्थियों के लिए दशहरा का महत्व

दशहरा विद्यार्थियों के लिए बहुत प्रेरणादायक त्यौहार है।

यह हमें मेहनत करने की सीख देता है।

यह त्यौहार विद्यार्थियों को बताता है कि उन्हें अपने लक्ष्य के प्रति ईमानदार रहना चाहिए।

कभी भी गलत रास्ते पर नहीं चलना चाहिए।

जैसे भगवान राम ने कठिनाइयों का सामना किया, वैसे ही हमें भी पढ़ाई में आने वाली परेशानियों से घबराना नहीं चाहिए।

अगर हम मेहनत करेंगे, तो हमें भी सफलता जरूर मिलेगी।

दशहरा का सामाजिक महत्व

जब पूरा समाज मिलकर रामलीला देखता है, मेले में जाता है और रावण दहन का कार्यक्रम देखता है, तो आपसी प्रेम और सद्भाव बढ़ता है। लोग अपने रिश्तेदारों और मित्रों से मिलते हैं और खुशियां बांटते हैं। इससे समाज में मेल-जोल और अपनापन बढ़ता है।दशहरा का आर्थिक महत्व

दशहरा केवल धार्मिक और सांस्कृतिक पर्व नहीं है, बल्कि यह भारत की अर्थव्यवस्था को गति देने वाला महत्वपूर्ण अवसर भी है। इस त्योहार से व्यापार, पर्यटन, रोजगार, कृषि और डिजिटल बाजार—सभी क्षेत्रों को लाभ मिलता है।

पर्यावरण और दशहरा

आजकल दशहरा पर बहुत ज्यादा पटाखे चलाए जाते हैं, जिससे हवा प्रदूषित होती है। हमें कम पटाखे चलाने चाहिए और पर्यावरण की रक्षा करनी चाहिए।

हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि त्योहार खुशी का होता है, ना कि दूसरों को नुकसान पहुंचाने के लिएलेकिन उससे किसी को नुकसान नहीं होना चाहिए।

निष्कर्ष

दशहरा एक बहुत ही सुंदर और प्रेरणादायक त्योहार है। यह हमें सिखाता है कि हमें हमेशा सच का साथ देना चाहिए और बुराई से दूर रहना चाहिए।

हम सभी को इस दिन यह संकल्प लेना चाहिए कि हम अपने अंदर की बुराइयों को दूर करेंगे और एक अच्छे इंसान बनेंगे।

दशहरा हमें सच्चाई, साहस, धैर्य और ईमानदारी की सीख देता है।

इसके साथ ही यह त्योहार हमें एकता और भाईचारे का भी संदेश देता है।

 

दशहरा हमें यह भी याद दिलाता है कि हमें अपने जीवन में अनुशासन और मर्यादा का पालन करना चाहिए। जैसे भगवान राम ने हर परिस्थिति में मर्यादा का पालन किया, वैसे ही हमें भी अपने माता-पिता, गुरुजनों और बड़ों का सम्मान करना चाहिए। विद्यार्थियों के लिए यह पर्व विशेष रूप से प्रेरणादायक होता है, क्योंकि यह हमें कठिनाइयों से लड़ने की शक्ति देता है।

आज के समय में जब समाज में कई प्रकार की बुराइयाँ मौजूद हैं, तब दशहरा का महत्व और भी बढ़ जाता है। हमें केवल रावण के पुतले को ही नहीं जलाना चाहिए, बल्कि अपने अंदर के अहंकार, क्रोध और लालच को भी समाप्त करना चाहिए। तभी दशहरा का वास्तविक अर्थ हमारे जीवन में साकार होगा।

अतःहमें हर वर्ष यह संकल्प लेना चाहिए कि हम एक अच्छे नागरिक बनेंगे और समाज में अच्छाई फैलाने का प्रयास करेंगे।

दशहरा से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न

दशहरा कैसे मनाया जाता है? 

दशहरा बहुत ही उत्सव और उमंग के साथ मनाया जाता है।मंदिरों और घरों में पूजा अर्चना की जाती है। लोग एक दूसरे को बधाइयां देते हैं और एक दूसरे को मिठाईयां बताते हैं। रामलीला और लंका दहन का आयोजन किया जाता है।

दशहरा को विजयदशमी क्यों कहते हैं? 

यह त्यौहार अश्विन  मांस के शुल्क पक्ष के दशमी तिथि को पड़ता है और इस दिन भगवान राम ने रावण को हराया था। साथ ही, इसी दिन माता दुर्गा ने महिषासुर का वध किया था।

इस कारण यह दिन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है, और इसी वजह से इसे विजयादशमी कहा जाता है।

दशहरा के 21 दिन बाद ही दीपावली क्यों मनाई जाती है?

दशहरा के 20-21 दिन बाद दीपावली मनाने का मुख्य कारण रामायण से जुड़ा है। राम ने दशहरा (आश्विन शुक्ल दशमी) पर रावण को हराया, फिर अयोध्या लौटने में 20 दिन लगे (विभिन्न स्थानों पर रुकते हुए)। कार्तिक अमावस्या पर उनके आगमन पर दीप जलाकर स्वागत किया गया, जो दीपावली बन गई। हिंदू चंद्र कैलेंडर में यह अंतर लगभग 20 तिथियों का होता है।

दशहरा,विजयदशमी,नवरात्रि और दुर्गा पूजा में क्या अंतर है?

दशहरा नवरात्रि के दसवें दिन मनाया जाता है इसमें रावण दहन किया जाता है। विजयदशमी दशहरा का ही दूसरा नाम है। नवरात्रि 9 दिनों तक चलता है इसमें देवी के नौ रूपों की पूजा की जाती है और उपवास रखा जाता है। दुर्गा पूजा में नव रात्रि के अंतिम पांच दिनों में मां दुर्गा की मूर्ति की पूजा और विसर्जन किया जाता है दुर्गा पूजा खासकर बंगाल और बिहार में प्रसिद्ध है।

 

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